Nehru, गांधी परिवार और कांग्रेस

गांधी परिवार और कांग्रेस

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भारतीय राजनीति में कांग्रेस पार्टी का एक अद्भुत ही इतिहास रहा है। 1885 की गठित यह पार्टी (Founder : Sir A.O.Hume, Shri Dadabhai Naoroji) ने अपने समय मॆ बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। उसने विभाजन भी देखे हैं। जनता का अटूट विश्वास कांग्रेस पार्टी को लगातार राजनीति में सर्वोपरि रखा। मुख्य सदस्य और कार्यकर्ताओं में गांधी परिवार की अहम भूमिका रही है। गांधी परिवार अर्थात यहां हम नेहरू वंश की बात कर रहे हैं।

खान से गांधी तक की यात्रा

mahatma Gandhi

पंडित जवाहरलाल नेहरू अपनी पुत्री श्रीमती इंदिरा कॆ प्रेम विवाह पर बहुत ही नाराज थे। उन्होंने साफ तौर पर इंदिरा नेहरू को अपने वंश से अलग हुआ माना। किंतु महात्मा गांधी ने पति फिरोज खान को अपना नाम दीया। तभी से नेहरू परिवार के वंशज गांधी परिवार के रूप में जाना जाने लगे। अब फिरोज खान से फिरोज गांधी बनने पर इंदिरा नेहरू अर्थात इंदिरा गांधी का राजनीतिक भविष्य पटरी पर लौट गया था। उसका बखूबी फायदा इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरी करने में लिया। चीन और पाकिस्तान की युद्ध के बाद जब पूर्वी पाकिस्तान को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर दिया तो दुनिया ने गांधी का लोहा माना और आयरन लेडी के खिताब से सम्मानित किया। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक कैरियर में किसी को भी आगे बढ़ने नहीं दिया अर्थात अपना दबदबा पूरी तरीके से कायम रखा। इंदिरा गांधी के 2 पुत्र थे संजय गांधी और राजीव गांधी। उस समय संजय गांधी राजनीति में सक्रिय रहे जबकि पायलट का रास्ता चुना और राजनीति से दूर रहे ।

राजीव गांधी और कांग्रेस

संजय गांधी की आकस्मिक मृत्यु के बाद भाई राजीव गांधी ने राजनीतिक जीवन की बागडोर संभाली और जनता से सीधा संवाद करके उनके दिलों में बसने की कोशिश करने लगे। राजीव गांधी शांत दिमाग के राजनेता थे और कोई भी काम हड़बड़ी नहीं करना पसंद नहीं करते थे। इसी बीच उनकी मुलाकात इटली के मध्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली लड़की सोनिया से हुई। सोनिया को समय नहीं पता था कि वह आगे चलकर भारत देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के घर की बहू बनेगी ।

राजीव गांधी ज्यादातर जनता से सीधा संवाद और घुलना मिलना पसंद करते थे। उनके समय में आम जनता को प्रधानमंत्री राजीव गांधी को छूना, हाथ मिलाना, माला डालना आदि सहूलियत आसानी से उपलब्ध थी। जिसका फायदा उस समय श्रीलंका की विद्रोही ग्रुप तमिल टाइगर्स अर्थात लिट्टे ने उठाया। 21 May 1991, Sriperumbudur, एक जनसभा के संबोधन के लिए जाते हुए राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला किया गया जिसमें उनकी तात्कालिक मृत्यु हो गई और कांग्रेस पार्टी की बागडोर उनकी पत्नी सोनिया गांधी के हाथों में आ गई।

सोनिया गांधी ने राजनीति की गलियारों में कदम रखा और पार्टी को सबसे मजबूत पार्टी के रूप में बनाए रखा। उन्होंने नए-नए तरीकों से राजनीति को नई धार दी जैसे मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के लिए चयनित करना।
मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए कांग्रेश ने लगातार 10 साल शासन किया। सोनिया गांधी के दो बच्चे राहुल और प्रियंका हुए।

राहुल गांधी (परिवार) और कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी ने परिवारवाद और वंशवाद की परंपरा निभाते हुए अपनी कमान राहुल गांधी के हाथों में सौंप दी। किंतु वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी की 2014 से लगातार जीत राहुल गांधी के नेतृत्व पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। आज कांग्रेस पार्टी जमीनी हकीकत को ना समझ कर केवल जुमलों और नकारात्मक राजनीति पर ही अमित नजर आ रही है।

आज कांग्रेस के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगा नजर आ रहा है तो कहीं ना कहीं यह भारतीय राजनीति में बदलते परिवेश और चुनावी समीकरण का भी प्रतीक है। कभी पूरे भारत पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस पार्टी आज हाशिए पर खड़ी नजर आ रही है। 543 सीटों मे केवल सीटों का आंकड़ा पार कर पाना कांग्रेस की नाकामयाबी को बयां करता है।

आज कांग्रेस पार्टी में ओछे भाषण देने वाले और राजनीति करने वाले ही नजर आ रहे हैं। कभी भारत देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली और 60 साल राज करने वाली यह पार्टी एक अदद नेतृत्व को तरस रही है।

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19 thoughts on “गांधी परिवार और कांग्रेस”

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