दीदी,सांड़ और जय श्री राम,

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यह लाइन पढ़कर शायद आप चौंक गए होंगे । जी हां हम बात कर रहे हैं देश के पश्चिम बंगाल राज्य की मुख्यमंत्री “ममता बनर्जी” ,जिनको “दीदी” नाम से भी जानते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण से पहले ममता बनर्जी पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जानबूझकर जय श्री राम के नारे से चिढ़ाने का आरोप लगा है। जानकर शायद हैरानी होगी की ममता बनर्जी जय श्री राम के नारे से चिढ़ती नजर आती हैं। वही भाजपा के उत्तराखंड एक कार्यकर्ता/नेता द्वारा एक अजीबोगरीब उदाहरण दिया गया। जिसमें कहा गया कि दीदी, “जय श्री राम” नाम के नारे को सुनकर ऐसी चिढ़ती हैं, जैसे लाल कपड़े को देख कर सांड़।

इस घटनाक्रम के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने बार-बार जय श्री राम का नारा लगाकर मामले को राजनीतिक रंग दिया है। वही भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने 10000 पोस्टकार्ड पर जय बांग्ला और जय हिंद लिख कर प्रधानमंत्री मोदी को भेजा है।

केंद्रीय सरकार की ओर से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शपथ समारोह आमंत्रण को भी बंगाल सरकार ने मना कर दिया। इस तरीके के मूर्खतापूर्ण कदम से केवल पश्चिम बंगाल सरकार की किरकिरी ही हुई है। भारत देश की जनता के बहुमत से चुनी हुई सरकार आमंत्रण स्वीकार ना करना एक प्रकार से देश के साथ धोखा ही है।

नकारात्मक राजनीति

नकारात्मक राजनीति में अग्रणी रहने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उर्फ दीदी को यह बात समझनी चाहिए कि संविधानिक ढंग से चुने हुए किसी भी प्रधानमंत्री के शपथ समारोह से किनारा काटना एक अविवेक पूर्ण और मूर्खता भरा कदम ही दिखता है। जो एक राजनीतिक अपरिपक्व नेता को ही रेखांकित करता है। अभी हाल में ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आमंत्रित नीति आयोग की बैठक में सम्मिलित होने से ममता बनर्जी ने साफ मना कर दिया है और कहा है कि वित्तीय अधिकार ना होने के कारण नीति आयोग का कोई भी मतलब नहीं बनता और उसमें सम्मिलित होना बेकार है।

इन सब कदमों से राज्य सरकार की छवि धूमिल होती ही नजर आ रही है और रूप से नजर आ रहा है कि ममता बनर्जी के लिए देश से बढ़कर पार्टी और अपना घर है।
शायद भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत को वह पचा नहीं पा रही और अजीबोगरीब बयान देकर अपना बचपना ही दिखा रही हैं।

राजनीतिक अपरिपक्वता

ममता बनर्जी, दीदी,

“खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे” वाली कहावत आज के समय ममता बनर्जी के ऊपर सटीक बैठ रही है। पहले भी ममता बनर्जी कई बार अपना राजनीतिक उतावलापन दिखा चुकी हैं और अपनी फजीहत करा चुकी हैं। दिल्ली में भी धरना देना उनके इसी तरीके के कार्यों का उदाहरण रहा है जिसमें उन्हें मुंह की खानी पड़ी और थक-हारकर अपने घर पश्चिम बंगाल वापस लौटना पड़ा ।

इतना सब कुछ होने के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कि नहीं दिख रही। आने वाला भविष्य ही बता सकता है की पश्चिम बंगाल की जनता को क्या समझ में आता है।

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